मिथुन राशि वार्षिक भविष्यफल 2020 :

मिथुन राशि वार्षिक भविष्यफल 2020 :
 
मिथुन राशिफल 2020 के अनुसार इस वर्ष आप काफी बेहतर निर्णय लेंगें। लाइफ के कई मुश्किल और महत्वपूर्ण निर्णय भी आप बड़ी सूझ-बूझ के साथ ले सकते हैं। दरअसल वर्ष की शुरुआत में आपकी राशि के स्वामी बुध नव वर्ष 2020 की शुरुआत के समय बनी वर्ष कुंडली में अपने से सातवें स्थान में होने से आपकी राशि को पूरी एनर्जी दे रहे हैं और आपका भरपूर सहयोग व मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। सूर्य के साथ होने से बुधादित्य योग भी आपके लिये बना रहे हैं। वर्ष की शुरुआत में गुरु भी वर्ष की बेहतर प्लानिंग बनाने में आपकी मदद कर रहे हैं। इस समय की गई प्लानिंग के कारण ही आगे का रास्ता आपके लिये काफी स्पष्ट होगा। किसी भी तरह का निर्णय लेने में आपको कोई परेशानी नहीं आएगी। चूंकि इस साल की शुरुआत बुधवार से हो रही है इसलिये भी आपकी राशि के स्वामी बुध इस वर्ष के राजा भी हैं।
 
चंद्रमा आपकी राशि से भाग्य स्थान में रहेंगें जो कि आपके लिये उन्नति के, पदोन्नति के योग बना रहे हैं। स्वास्थ्य के मामले में भी इस वर्ष आप काफी फिट रह सकते हैं। जो जातक थोड़ी बहुत शारीरिक तौर पर असहज महसूस करते हैं वे भी अपनी फिटनेस पर इस वर्ष फोकस कर सकते हैं। तनाव से मुक्ति के लिये योग व अध्यात्म संबंधी क्रियाओं के लिये समय निकालना भी आपके लिये इस वर्ष अच्छे परिणाम लेकर आ सकता है। मंगल छठे भाव में होने के कारण प्रतिद्वंदी, विपक्षी, विरोधी अथवा शत्रु आपकी चिंताओं को तो बढ़ा सकते हैं लेकिन आपको किसी तरह का नुक्सान नहीं पंहुचा पाएंगें। शुक्र के अष्टम भाव में होने के कारण अपने लाइफ पार्टनर की सेहत के प्रति आपको थोड़ा ध्यान रखने की आवश्यकता रहेगी। यह सुनिश्चित करें कि आपका पार्टनर अपने खान-पान और विश्राम पर ठीक से ध्यान दे रहा है या नहीं। उनकी केयर कर आप अपने साथी की सेहत में सुधार तो करेंगें ही साथ ही आपके रिश्ते भी और अधिक मधुर, और अधिक गहरे, विश्वासपूर्ण बनेंगें। हालांकि सप्तम भाव में बुध, गुरु, सूर्य, केतु और शनि के एक साथ विराजमान होने से आपकी पर्सनल लाइफ में अचानक से उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। कभी-कभी आपको बहुत ज्यादा प्रेम तो कभी कभी बहुत ज्यादा मनमुटाव भी देखने को मिल सकता है। एक दूसरे की इगो आपके प्रेम के आड़े आ सकती है। सप्तम भाव में बन रहे इस पंचग्रही योग का सीधा प्रभाव आपके दांपत्य जीवन के साथ-साथ बिजनेस, फाइनेंस आदि लाइफ के विभिन्न पहलुओं पर पड़ेगा।
 
वर्ष की शुरुआत में आपकी ही राशि में विराजमान राहू भी अपना असर डाल सकते हैं जो कि आपको कार्य करने में धैर्य की कमी कर सकते हैं। हड़बड़ी या कहें जल्दबाजी में अक्सर सही काम के परिणाम भी अच्छे नहीं मिलते। इसलिये इससे जितना हो सके बचने का प्रयास करें। वर्ष की शुरुआत में राहू आपकी ही राशि में विराजमान रहेंगें जिससे योजनाएं तो बहुत सारी बनेंगी लेकिन साथ ही यह आपको भ्रमित भी करेंगे। कामकाज संबंधी यात्राएं भी हो सकती हैं। तथा स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। अति आत्मविश्वास से बचें। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके बारे में अच्छे से जानना बहुत जरुरी है।
24 जनवरी से शनि राशि परिवर्तन करते हुए आपकी राशि से अष्टम भाव में विराजमान हो जाएंगे। इसका लाभ आपको आपकी नेगेटिविटी को कम करने में मिलेगा। क्योंकि इससे पहले शनि की पूर्ण दृष्टि भी आप पर थी जिससे आपके कार्यों की गति धीमी हो रही थी। लेकिन अष्टम के शनि और उनकी तीसरी दृष्टि आपके कार्यक्षेत्र पर पड़ने से अचानक से आपके कार्यों में बदलाव के संकेत दे रहे हैं।
 
30 मार्च को बृहस्पति राशि परिवर्तन कर मकर राशि में प्रवेश करेंगें जो कि उनकी नीच राशि है। शनि वहां पर पहले से ही विराजमान हैं। शनि और गुरु का यह युति संबंध आपके लिये नीचभंग राजयोग बना रहा है जिसका लाभ आपको कार्यक्षेत्र में मिल सकता है।
 
11 मई को शनि का वक्र होना आपके लिये बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। आपके काम में कमियां निकाली जा सकती हैं। आप पर आरोप भी लग सकते हैं। अपने काम पर इस समय में विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी।
 
14 मई को गुरु वक्री हो जाएंगे जिससे आपकी पर्सनल लाइफ में प्रेम, विवाह आदि के योग बनेंगें लेकिन इसके साथ ही विवाहेत्तर संबंध बनने की संभावनाएं भी हैं जिससे आपको बचना चाहिए। धन क्षेत्र में लाभ, पैतृक संपत्ति की प्राप्ति, नये घर नये वाहन आदि के योग भी इस समय में आपके लिये बनेंगें।
30 जून को धनु राशि में गुरु चले जाएंगें जिससे वह अपनी मूल स्थिति में आ जाएगें। जन्मस्थान, घर की ओर जाने (स्थान परिवर्तन) के योग आपके लिये बनेंगें।
 
13 सितबंर को गुरु के मार्गी होने से पुन: कार्यक्षेत्र में सफलता के योग बनने शुरु होंगे। नई योजनाएं भी इस समय जन्म ले सकती हैं। घर परिवार में किसी मांगलिक कार्य होने की भी प्रबल संभावनाएं हैं। हालांकि आपको इसमें थोड़ा धैर्य रखने की आवश्यकता रहेगी। जल्दबाजी या किसी दुविधा की स्थिति में अपनी लाइफ के महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें।
 
23 सितंबर को राहू राशि परिवर्तन कर वृषभ राशि में चले जाएंगे जो कि आपकी राशि से 12वें स्थान में होंगे जो कि व्यय का स्थान भी माना गया है। खर्चे अधिक बढ़ेंगें। लेकिन उच्च राशि में राहू का होना काफी समय से विदेश जाने का विचार यदि आपने बना रखा था तो इस समय उस पर आगे कदम बढ़ाने का यह सही समय होगा। इसके साथ ही केतु भी वृष की शुरुआत में दांपत्य जीवन में विराजमान रहेगा। जो कि आपकी पर्सनल लाइफ में द्वंद बनाकर रखेगा। वैचारिक मतभेद की संभावनाएं भी हैं। लेकिन अविवाहित जातकों के लिये अचानक से चट मंगनी पट ब्याह के योग भी बनाएगा। इसी समय केतु का परिवर्तन भी वृश्चिक राशि में हो जाएगा जिससे शत्रुओं पर विजय प्राप्ति के योग बनेंगें किसी भी प्रतियोगिता में विजय श्री प्राप्त हो सकती है।
 
इसके पश्चात 29 सितंबर को शनि के मार्गी होने पर आपको पुन: अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा हासिल हो सकती है। नवंबर के उतर्राध में गुरु के पुन: शनि के साथ आने से नीचभंग राजयोग का लाभ आपको फिर से मिलने लगेगा। करियर में खास तौर पर आपको इससे लाभ मिल सकता है।
 
कुल मिलाकर मिथुन कुंडली 2020 कहती है कि आपके लिये यह वर्ष आपके लिये काफी अच्छा रहेगा।
 
मिथुन राशिफल 2020 के अनुसार प्रभावी उपाय :
• पारिवारिक कलह को दूर करने के लिए तथा जीवन में कटुता का अनुभव ना हो इसके लिए महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन कन्या भोजन कराएं तथा उसे वस्त्र दक्षिणा आदि देकर प्रसन्न करें।
• शिक्षा में आने वाली बाधा को दूर करने के लिए, जिससे मन एकाग्र हो तथा आप के ऊपर जो अपयश लग सकता है, उससे बचने के लिए अपने गले में स्फटिक की माला धारण करें।
• दांपत्य जीवन में वैचारिक मतभेद और साझेदार के साथ यदि आपके कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है तो ऐसे में भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें तथा केले का प्रसाद वितरित करें। इसके अतिरिक्त हल्दी की दो गाँठ लें। एक गाँठ को बहते हुए जल में प्रवाहित करें तथा दूसरी गाँठ को अपने कार्यालय में रखें। साथ ही लक्ष्मी नारायण मंदिर में पीले वस्त्र अर्पित करें।
• भाग्योदय में आने वाली बाधाओं को समाप्त करने के लिए तथा कार्य में बार बार उत्पन्न होने वाले रोग को समाप्त करने के लिए काली गाय की सेवा करें तथा सर्दी के मौसम में किसी गरीब को काले रंग का कंबल दान करें।
• हनुमान जी के मंदिर में लाल चंदन की माला अर्पित करें।
• शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें।
• शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे चीटियों को खाने के लिए शक्कर डालें तथा स्वयं बुध देव के मंत्रों का जाप करें।
• माता दुर्गा के बीसा यंत्र की पूजा करे।
 
 

तंत्राचार्य –

हर समस्या का स्थायी और 100% समाधान के लिए संपर्क करे : मो. 9438741641 {Call / Whatsapp}

Website : http://www.srimaakamakhya.com

जय माँ कामाख्या

Leave a Reply