धनु राशि वार्षिक भविष्यफल 2020 :

धनु राशि वार्षिक भविष्यफल 2020 :
 
धनु राशि के जातकों के लिये वर्ष 2020 बहुत ही शुभ रहने के आसार हैं क्योंकि वर्ष की शुरुआत में ही राशि स्वामी बृहस्पति स्वराशि में विराजमान रहेंगें। गुरु का स्वराशि में होना आपके लिए हंस महायोग बनाएगा। इस योग के होने से आपके अंदर एक नई ऊर्जा का संचार होगा। कहा जाता है कि लग्न या राशि में बृहस्पति के होने से आपके अंदर जो भी अवगुण हैं वह किसी के सामने नहीं आ पाते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने अवगुणों को छुपाएं। आप इस अवसर का लाभ उठाकर अपने अवगुणों को समाप्त कर सकते हैं।
 
धन के स्थान में शुक्र विराजमान हैं जिनके प्रभाव से इस वर्ष आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी खासी रहेगी क्योंकि शुक्र लाभ स्थान के स्वामी होकर धन के स्थान में विराजमान हैं। भाग्य भी इस वर्ष 2020 में भरपूर सहयोग करने वाला है क्योंकि भाग्य के स्वामी सूर्य आपकी ही राशि में विराजमान हैं। कर्मभाव के स्वामी व दांपत्य जीवन के स्वामी ग्रह बुध केंद्र में ही गुरु केतु सूर्य शनि के साथ विराजमान हैं इसके प्रभाव से कार्यक्षेत्र में नई-नई योजनाएं जन्म लेंगी। विशेषकर जो भी व्यक्ति शिक्षा से संबंधित क्षेत्र में कार्यरत हैं उनके लिये तो ये सोने पर सुहागे वाला काम करेंगे। विदेश में शिक्षा पाने के इच्छुक जातकों के लिये विदेश में शिक्षा पाने के योग भी बन रहे हैं। क्योंकि पंचमेश कारक ग्रह मंगल जो कि शिक्षा के स्वामी बने हुए हैं वह 12वें स्थान में विराजमान हैं जो विदेश जाने के लिये जातक को प्रेरित करता है।
 
राहू का सप्तम स्थान में होना आपके दांपत्य जीवन के लिये कड़वाहट पैदा कर सकता है। इसलिए आपको अपने जीवनसाथी के साथ प्रेम व विश्वास का रिश्ता बनाए रखने की आवश्यकता है। जिन प्रेमी प्रेमिकाओं का नया-नया रिश्ता जुड़ा हो उनके लिये रिश्तों में विच्छेद का कारण राहू बन सकता है। ऐसे में आपको अपने साथी पर विश्वास बनाए रखाना होगा और उसे उचित समय भी देना होगा।
 
वर्ष की शुरुआत में शनिदेव 24 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगें जो कि आपकी राशि से दूसरे स्थान पर रहेंगें। दूसरा स्थान धन व कुंटुंब परिवार का कारक माना गया है। इस लिये आपकी आर्थिक स्थिति के लिए मजबूत रहने व परिवार में प्रेम व शांति का वातावरण बने रहने के आसार हैं। कुटुंब के किसी बड़े व्यक्ति की ओर से आपको अच्छा सहयोग मिल सकता है।
 
गुरु 30 मार्च को मकर राशि में शनि के साथ प्रवेश करेंगें जो कि आपकी राशि से धन भाव में नीच भंग राजयोग बना रहे हैं। गुरु वैसे भी आपकी राशि के स्वामी भी हैं जिनका धन भाव में नीचभंग राजयोग बनाना आपके व्यक्तित्व में निखार लायेगा। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि करेगा। कुटुंब परिवार में आपका मान-सम्मान व रूतबा बढ़ेगा। गुरु की पंचम दृष्टि शत्रु व रोग घर पर पड़ने से रोग भी कम होने की उम्मीद कर सकते हैं। कर्मक्षेत्र पर नवम दृष्टि होने से शुभ परिणाम देखने को मिलेंगें।
 
11 मई को शनि वक्र हो रहे हैं। वक्र होने पर धन हानि व कुटुंब परिवार में कलह की स्थिति बन सकती है। इस समय पर कोई भी लेन-देन न करें क्योंकि वक्र ग्रह के प्रभाव से लिया हुआ पैसा दे नहीं पाएंगे तो दिया हुआ पैसा वापस मिलने में भी आपको परेशानी हो सकती है।
 
14 मई को गुरु मकर राशि में ही वक्री हो जाएंगे जिसके पश्चात आर्थिक स्थिति में आपको मिलाजुला असर देखने को मिल सकता है। लेकिन मानसिक संतुष्टि अधिक मिलेगी तथा चारों तरफ से हर कार्य में सफलताएं मिलनी शुरु होंगी।
 
30 जून को गुरु वक्री अवस्था में ही धनु राशि में आ जाएंगे जिससे पिछले समय से अधूरे चल रहे कुछ कार्यों को पूरा करने में आपको समय लगा सकते हैं।
 
13 सितंबर को गुरु मार्गी हो जाएंगें जिसके बाद भविष्य की योजनाएं बनाने में आप व्यस्त हो सकते हैं।
 
राहू 23 सितंबर को आपकी राशि से छठे स्थान पर विचरण करेंगें तथा केतु जो कि आपकी में ही विराजमान थे वो भी अब 12वें स्थान में आ जाएंगें। राहू का वृषभ राशि और रोग स्थान में आना आपके लिये रोग और शत्रुता की उत्पति करने वाला बन सकता है। छठा स्थान प्रतिस्पर्धा का भी होता है इस लिये यहां भी आपके लिये प्रतिस्पर्धा काफी चुनौतिपूर्ण रहेगी। केतु का लग्न से व्यय स्थान में आना खर्च की बढ़ोतरी करने वाला रह सकता है। यह समय आपके लिये ऋण लेने वाल भी हो सकता है। फिजूल खर्ची से बचकर रहें। बहुत जरूरी हो तो ही खर्चा करें।
 
शनि 29 सितंबर को मार्गी होंगे। मार्गी होने पर पुन: आपके लिये स्थितियां बदलनी शुरु होंगी। अचानक से धन लाभ की संभावनाएं बन सकती हैं। रूका हुआ धन भी इस समय आपको प्राप्त हो सकता है।
 
20 नवंबर को गुरु पुन: मकर राशि में आ जाएंगे जिसके पश्चात अपने सपनों को साकार करने के लिये आप मेहनत कर सकते हैं। ससुराल पक्ष से भी आपको इस समय अपेक्षित सहयोग मिल सकता है।
 
 
धनु राशिफल 2020 के अनुसार प्रभावी उपाय :
• हर शनिवार को छाया पात्र दान करें।
• धार्मिक स्थलों की साफ सफाई करें।
• चीटियों और मछलियों को आटा खिलाएं।
• महाराज दशरथ कृत नील शनि स्त्रोत का पाठ करें।
• सूर्य देव को तांबे के पात्र में कुमकुम मिलाकर अर्ध्य दें।
 

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जय माँ कामाख्या

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